छपरा एक्सप्रेस फिल्म

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पूजा- गाँव की चिंता नहीं है मुझे तेरी फ़िक्र है और तुझ पर कोई आंच आये ये मैं होने नहीं दूंगी एक काम करते है अभी लाल मंदिर चलते है और रास्ते में जुम्मन को कहते चलेंगे की यहाँ कुछ आदमियो का पहरा लगा दे.

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वो-जब ठंडी हवा अपनी खुशुबू फिज़ाओ में फैलाएगी जब खमोश रस्ते तेरी आवाज से गुन्जेंगे जब ढलती सांझ रात से मिलेगी जब मन मेरा होगा और दर्पण तेरा तब अपना मिल्न होगा. दोनों दोस्त अय्याशीयो के सागर में बहुत गहरे उतर चुके थे इधर न जाने कितने पल आते जब पद्मिनि को अपने साथी की जरुरत होती पर अपना मन मसोस कर रह जाती शायद वो रक्षा बंधन का दिन था ठाकुर हुकुम सिंह बहुत उदास थे क्योंकि आज ही के दिन उनकी बहन की मौत हो गयी थी.

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आषाढी एकादशी रांगोळी

ಪಬ್ಲಿಕ್ ಟಿವಿ ಲೈವ್ ಇನ್ ಕನ್ನಡमैं- आपके एक इशारे पर जान दे दू पर जबतक राणाजी ये वचन न दे की ये सब बंद होगा मैं अलग हु उनसे पर मैं इस काबिल भी हु की घर के बाहर से भी अपनी जिम्मेवारियां निभा सकू.

नौ बजे के करीब मैं ऋषिकेश पहुंच गया। घर में घुसते ही किसी त्योहार जैसा माहौल लग रहा था। मम्मी-पापा और भाई-बहन, सब नए-नए कपड़े पहनकर तैयार थे। सबके चेहरे खुशी से खिले हुए थे। गर्मागर्म नाश्ता भी मेरे लिए तैयार था।. मेरे गुस्से की आक्टिंग और फौरी बहाने ने काम कर दिखाया और मम्मी का गुस्सा भी एक दम ख़तम हो गया साथ ही उनकी तवाज्जा भी बँट गयी और वो अपने कपड़ों की तरफ देखते हुए मूँह बना कर बोली,.

मैं नजमा की तरफ देख कर मुस्कुराया और किचेन मे चला गया, देखा मम्मी सड़विच बना बना कर प्लेट मे रख रही थी, मुझे किचेन मे आता.

शाहजी की बात तो मैं समझ रहा था और यह सोच रहा था कि मेरे घर से निकालने के बाद शाहजी तो दरवाज़ा बंद कर देगा फिर मैं चुदाई कैसे देख सकूँगा, मैं जल्दी से बोला, शाहजी मैं तुम्हारी बात बिल्कुल समझ रहा हूँ मगर मैं तो बाहर रहूँगा और तुम दरवाज़ा बंद कर लोगे फिर मैं चुदाई कैसे देख सकूँगा..

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छपरा एक्सप्रेस फिल्म: बदन को सॉफ करके कपड़े पहनने की बजाए सिर्फ़ टवल लपेट कर ही ऊपर आकर मम्मी को आवाज़ देने लगे तो मैने कहा, आप लोगों के जाने के बाद मामा जान आए थे मम्मी उनके साथ नानी जान के घर चली गयी थी और अभी तक वापस नही आई हैं और शायद आज आ भी. सफ़ेद ब्लाउज और गहरे नीले घाघरे में एक दम पटाखा लग रही थी चंदा चाची मुझे देख कर वो खुस हो गयी मेरी नजर चाची के मदमस्त उभारो पर पड़ी तो दिल का हाल और बुरा होने लगा हम घर के अंदर आ गए.